भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन बेंगलुरु में बन रही है, 280 किमी/घंटा होगी अधिकतम रफ्तार

बेंगलुरु। भारत उच्च गति रेल प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी पहली पूर्णतः स्वदेशी बुलेट ट्रेन के निर्माण को तेजी से बढ़ा रहा है जो अगले वर्ष 15 अगस्त को वापी से सूरत के बीच चलाई जाएगी।

इस हाई-स्पीड ट्रेन का निर्माण कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित बीईएमएल संयंत्र में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए किया जा रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज बीईएमएल के ‘आदित्य’ संयंत्र में स्वदेशी बुलेट-ट्रेन बी28 के निर्माण का जायजा लिया।

रेल मंत्री ने कारबॉडी फैब्रिकेशन (डिब्बे के निर्माण) के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उच्च-सटीकता वाले जिग्स और फिक्स्चर सहित विशेष विनिर्माण बुनियादी ढांचे का निरीक्षण किया। उन्होंने अंडरफ्रेम, साइडवॉल, छत की असेंबली, कार असेंबली, सतह की तैयारी (surface preparation) और ट्रीटमेंट जैसे उत्पादन के प्रमुख चरणों को प्रत्यक्ष रूप से देखा। हाई-स्पीड रेल परिचालन के लिए आवश्यक सटीकता, मजबूती और गुणवत्ता मानकों को हासिल करने में ये आधुनिक निर्माण प्रक्रियाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने ‘स्क्वीज टेस्ट’ का प्रदर्शन भी देखा। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण गुणवत्ता जांच प्रक्रिया है, जिसमें ट्रेन की कारबॉडी की संरचनात्मक मजबूती, कठोरता और उसके आकार की स्थिरता का आकलन करने के लिए उस पर नियंत्रित दबाव और खिंचाव डाला जाता है।

उन्होंने हाई-स्पीड यात्रा के दौरान यात्रियों को मिलने वाले आराम और सुविधा को ध्यान में रखते हुए यात्री सीटों का अवलोकन किया। इसके अलावा, उन्होंने ऑनबोर्ड प्रणालियों और उपकरणों, जैसे—हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग सिस्टम, कपलर और अन्य ट्रेन उपकरणों एवं असेंबली का गहन मुआयना किया।

रेल मंत्री ने साइड मॉड्यूल और रूफ (छत) मॉड्यूल के निर्माण के साथ-साथ उनके इंटीग्रेशन (एकत्रीकरण) और असेंबली कार्यों का भी जायजा लिया।

रेल मंत्रालय के अनुसार, स्वदेशी विशेषज्ञता से निर्मित यह बुलेट ट्रेन भारतीय परिस्थितियों और यात्रियों की सुरक्षा तथा आराम को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इस स्वदेशी बुलेट ट्रेन की अधिकतम टेस्ट स्पीड 280 किलोमीटर प्रति घंटा तथा परिचालन गति 249 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। 202 मीटर लंबी इस ट्रेन में कुल 8 कोच (4 मोटर कार और 4 ट्रेलर कार) शामिल हैं।

भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दो 8-कोच वाली ट्रेनों को जोड़कर 16-कोच की ट्रेन बनाने का भी प्रावधान रखा गया है। 557 यात्रियों की कुल क्षमता वाली इस ट्रेन में 7 स्टैंडर्ड क्लास और 1 एग्जीक्यूटिव क्लास कोच बनाए गए हैं, तथा इसमें दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर अनुकूल दरवाजे, 2 विशेष सीटें, लेवल बोर्डिंग और ब्रेल लिपि में साइनबोर्ड जैसी आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं।

यात्रियों के लिए ट्रेन के इंटीरियर को एर्गोनॉमिक रूप से डिज़ाइन किया गया है, जिसमें प्रत्येक सीट रो पर बड़ी खिड़कियां, पर्याप्त लेगरूम, एलईडी लाइटिंग, चार्जिंग प्वाइंट, ओवरहेड रैक, बड़े सामान के लिए फ्लोर-स्टैंड और आधुनिक बायो-डिजेस्टर शौचालय मौजूद हैं।

इसके अलावा, वाई-फाई आधारित इंफोटेनमेंट सिस्टम, हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी देने वाले एलसीडी डिस्प्ले, ऑडियो गाइडेंस और आपातकालीन टॉक-बैक यूनिट की व्यवस्था भी की गई है।

ट्रेन का बाहरी सिरा ‘कंप्यूटेशनल फ्लूइड डायनेमिक्स’ सिमुलेशन के आधार पर एयरोडायनामिक रूप से डिजाइन किया गया है, जिससे हवा का प्रतिरोध और टनल का शोर कम होता है। यह ट्रेन 25 केवी, 50 हर्ट्ज़ एसी ट्रैक्शन सिस्टम पर संचालित होगी और ऊर्जा दक्षता के लिए इसमें रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम तथा डिब्बों को शांत रखने के लिए आधुनिक साउंड इंसुलेशन का उपयोग किया गया है।

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेलवे काॅरीडोर का निर्माण तेज़ी से चल रहा है। इस समय तक करीब 83 प्रतिशत ढांचा तैयार हो गया है। इसका एक हिस्सा वापी से सूरत के बीच करीब 100 किलोमीटर का अगले साल 15 अगस्त को खोला जाएगा।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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