विकसित भारत के लिए पिछड़े राज्यों को प्राथमिकता जरूरी:वित्त मंत्री

केंद्र सरकार से तीन प्रमुख मांग—खनन पर सेस लगाने का अधिकार की पुनर्बहाली, जीएसटी से हुई क्षति की पूर्ति  और जी-राम-जी योजना में 90:10 का अनुपात बहाल किया

नई दिल्ली। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन “विकसित भारत की यात्रा के वित्तपोषण” में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य के हितों को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए दलीय राजनीति से ऊपर उठकर आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को विशेष सहयोग देना अनिवार्य है। यह सम्मेलन 18–19 सितंबर को केंद्रीय वित्त मंत्री एवं सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों की उपस्थिति में आयोजित हुआ।

वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल मजबूत अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि एक समतामूलक और सशक्त समाज का निर्माण भी इसका आधार होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रति व्यक्ति आय, जीडीपी, विनिर्माण उत्पादन और वित्तीय आंकड़े तब तक सार्थक नहीं हैं जब तक समाज की वास्तविक आर्थिक और सामाजिक स्थिति का समुचित आकलन न हो।

उन्होंने वर्तमान राजनीति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जाति और धर्म के आधार पर विभाजन देश के समग्र विकास में बाधा है। भारत की प्रति व्यक्ति आय अभी भी वैश्विक शीर्ष देशों से काफी कम है और आय वितरण की असमानता एक बड़ी चुनौती है। नीति आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि गरीबी उन्मूलन के दावे जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी होने चाहिए।

कृषि क्षेत्र पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि देश की 70% आबादी गांवों में रहती है और आधी खेती वर्षा पर निर्भर है। ऐसे में सिंचाई, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में वित्तपोषण बढ़ाना जरूरी है। साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में निवेश को भी प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।

झारखंड के संदर्भ में उन्होंने कहा कि केंद्र की नीतियों के कारण राज्य को 20,000 से 22,000 करोड़ रुपये तक की संभावित आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। खनिज क्षेत्र में संशोधनों और कर नीतियों ने राज्य के राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।

हालांकि, झारखंड की वित्तीय उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य नीति आयोग की ‘अचीवर’ श्रेणी में शामिल है, राजस्व संग्रह मजबूत है, राजकोषीय घाटा नियंत्रित है और पूंजीगत व्यय उच्च स्तर पर बना हुआ है।

अंत में उन्होंने केंद्र सरकार से तीन प्रमुख मांगें रखीं—खनन पर सेस लगाने का अधिकार पुनर्बहाल किया जाए, जीएसटी से हुई क्षति की भरपाई की जाए और जी-राम-ग योजना में 90:10 का अनुपात बहाल किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्यों के सशक्त होने से ही भारत विकसित बन सकेगा।

विकसित भारत की यात्रा के वित्तपोषण” कार्यक्रम में शामिल प्रतिनिधिमंडल में झारखंड वित्त सचिव प्रशांत कुमार,  अपर सचिव कर्ण सत्यार्थी,  चन्द्रभूषण प्रसाद, संयुक्त सचिव, अनिरबान आईच, आप्त सचिव, नरेन्द्र कुमार, आप्त सचिव उपस्थित रहे।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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