किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना पर छह राज्यों के बीच समझौता

नई दिल्ली। किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना को लेकर छह राज्यों ने मंगलवार को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसमें हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली शामिल हैं। प्रस्तावित परियोजना यमुना की सहायक नदी टोंस पर बनेगी। समझौते से परियोजना को आगे बढ़ाने और राज्यों के बीच लंबित समन्वय संबंधी मुद्दों के समाधान की उम्मीद है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। परियोजना का उद्देश्य यमुना बेसिन में जल भंडारण बढ़ाने के साथ बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण को मजबूत करना है। यमुना बेसिन के जल संसाधनों के बंटवारे को लेकर राज्यों के बीच समन्वय की कमी के कारण यह परियोजना लंबे समय से लंबित थी।
गृहमंत्री ने कहा कि सरकार ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है। इसका लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय भार भारत सरकार वहन करेगी और शेष 10 प्रतिशत राशि 1994 के समझौते के अनुसार भागीदार राज्य वहन करेंगे।
अमित शाह ने बताया कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊँचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनेगा, जहां 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर जल संग्रहण होगा। इससे 97 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत भी प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे बड़ा लाभ दिल्ली को होगा।
गृहमंत्री ने कहा कि जब यमुना के जल का बंटवारा हुआ, तब नीति-निर्धारकों की ओर से एक गंभीर चूक हुई। यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह की गणना ही नहीं की गई और जितना जल उपलब्ध था, वह सब राज्यों के बीच बाँट दिया गया। नदी के लिए जल छोड़ा ही नहीं गया। उन्होंने कहा कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौते से 25 प्रतिशत जल आएगा, वह दिल्ली और यमुना दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। इससे पर्यावरण संरक्षण भी होगा।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह एवं केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की उपस्थिति में आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौता पर हस्ताक्षर किए।
अमित शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में दसवां जल विवाद समाप्त होने जा रहा है। उनके नेतृत्व में बीते 50 वर्षों से चले आ रहे गंभीर विवादों को समाप्त करने का अभियान चला है। सबसे पहले अगस्त 2018 में लखवार बहुउद्देशीय परियोजना का विवाद समाप्त हुआ। उसी महीने शाहपुर कंडी बांध परियोजना का विवाद सुलझा। वर्ष 2019 में ऊपरी यमुना बेसिन की रेणुकाजी बहुउद्देशीय बांध परियोजना का विवाद समाप्त हुआ। वर्ष 2021 में केन-बेतवा लिंक परियोजना पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच समझौता हुआ, जिससे बुंदेलखंड जैसे जल-संकटग्रस्त क्षेत्र को लाभ मिला। संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल रिवर लिंक योजना वर्ष 2024 में आगे बढ़ी। हथिनीकुंड से भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से यमुना तक जल अंतरण की योजना फरवरी 2024 में स्वीकृत हुई। नर्मदा परियोजना से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास का विवाद जुलाई 2026 में पूर्ण हुआ। सोन बेसिन में बिहार और झारखंड के बीच जल बंटवारे का विवाद अगस्त 2026 में सुलझा और आज अंततः किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना परियोजना पर सहमति बनी।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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