एशियाई खेलों में पदक का रंग बदलना चाहती हैं आशी चौकसे, बोलीं- ‘हम अजेय होंगे’

भोपाल। वर्ष 2018 में निशानेबाजी की दुनिया में कदम रखने वाली भारतीय राइफल निशानेबाज आशी चौकसे अब अपने दूसरे एशियाई खेलों के लिए तैयार हैं। 24 वर्षीय आशी ने पिछले एशियाई खेलों में तीन पदक जीते थे और अब जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों में अपने पिछले प्रदर्शन को स्वर्ण पदक में बदलने के लक्ष्य के साथ उतरेंगी।

आशी ने 2022 एशियाई खेलों में, जो 2023 में आयोजित हुए थे, महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम और महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन टीम स्पर्धा में रजत पदक जीते थे। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया था।

पिछले एशियाई खेलों का अनुभव आशी के लिए आगामी प्रतियोगिता में काफी मददगार साबित होगा। उन्होंने कहा कि अब उन्हें इस स्तर की प्रतियोगिता में प्रदर्शन करने की बेहतर समझ और आत्मविश्वास है।

आशी ने एक बयान में कहा, “एशियाई खेल ओलंपिक के बाद सबसे बड़े बहु-खेल आयोजनों में से एक हैं और मैं पहले भी वहां हिस्सा ले चुकी हूं। मैंने उस मंच पर प्रदर्शन किया है और मुझे पता है कि वहां क्या करना होता है। तीन पदक जीतने के बाद अब मेरे पास इस स्तर पर खेलने का अच्छा अनुभव है। इसलिए इस बार मैं जापान स्पष्ट सोच और लक्ष्य के साथ जा रही हूं।”

एशियाई खेलों की तैयारी के लिए भारतीय निशानेबाजी दल ने भोपाल में कई कड़े प्रशिक्षण शिविर लगाए। इन शिविरों में मुकाबले और फाइनल के अभ्यास के साथ खिलाड़ियों की सहनशक्ति और स्थिरता पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

आशी ने बताया, “हमने तैयारी में काफी मेहनत की। शिविर में मुकाबलों और फाइनल का अभ्यास कराया गया। 10 दिन के शिविर में हमने तीन-चार मुकाबले और तीन-चार फाइनल खेले। 60 शॉट का मुकाबला भी काफी गहन होता है। हमने 120 शॉट का मुकाबला भी खेला, जो किसी प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं है, लेकिन इसका उद्देश्य लंबे समय तक हमारी सहनशक्ति और स्थिरता को परखना था।”

भारतीय निशानेबाज खेल मनोवैज्ञानिकों के साथ भी काम कर रहे हैं और बायोफीडबैक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके जरिए खिलाड़ियों की सांस लेने की प्रक्रिया और निशाना लगाते समय शरीर की प्रतिक्रियाओं को समझने की कोशिश की जा रही है।

आशी ने कहा, “मनोवैज्ञानिक तकनीक की मदद से निशाना लगाते समय हमारी सांस और शरीर की अन्य प्रक्रियाओं पर नजर रखते हैं। हमने इसे कई बार आजमाया है और यह काफी मददगार रहा है। इससे हमें खुद को बेहतर समझने में मदद मिली है। हमें सोने से पहले और सुबह उठने के बाद कुछ अभ्यास भी करने को कहा गया है।”

उन्होंने कहा कि निशानेबाजी में छोटी-छोटी चीजें भी काफी मायने रखती हैं। “हमें पता है कि क्या करना है और कैसे निशाना लगाना है, लेकिन कुछ छोटी चीजें नजरअंदाज हो जाती हैं। अगर हम उन्हें सही तरीके से और लगभग पूर्णता के साथ कर लें, तो मुझे लगता है कि हम अजेय होंगे।”

पिछले एशियाई खेलों के दबाव का अनुभव कर चुकीं आशी इस बार ज्यादा आत्मविश्वास और संयम के साथ उतरना चाहती हैं। उनका लक्ष्य साफ है—पिछली बार मिले पदकों का रंग बदलकर स्वर्ण पदक हासिल करना।

उन्होंने कहा, “मैं इसे स्वर्ण पदक में बदलने को लेकर उत्साहित और पूरी तरह समर्पित हूं। मैं यह बहुत, बहुत ज्यादा चाहती हूं।”

आशी चीन की मजबूत निशानेबाजी टीम के खिलाफ मुकाबले को लेकर भी उत्साहित हैं। पिछले एशियाई खेलों में महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन स्पर्धा में भारत की सिफ्ट कौर समरा ने स्वर्ण और आशी ने कांस्य पदक जीता था, जबकि चीन की निशानेबाज को रजत पदक मिला था।

आशी ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं चीन की निशानेबाजी टीम के खिलाफ मुकाबले को लेकर काफी उत्साहित हूं। वे बहुत मजबूत टीम हैं। 2023 में हमने स्वर्ण और कांस्य जीता था और उन्हें अपने ही घर में रजत मिला था। हो सकता है कि वे अभी भी इसे याद कर रहे हों और बदला लेना चाह रहे हों। वे मजबूत टीम हैं, लेकिन मैं उनके खिलाफ मुकाबले को लेकर वास्तव में उत्साहित हूं।”

स्कूल के एक शिविर में संयोग से पहली बार राइफल हाथ में लेने से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज बनने तक आशी चौकसे का सफर तेजी से आगे बढ़ा है। उन्होंने पहली बार एनसीसी शिविर में निशानेबाजी आजमाई थी और शुरुआती प्रदर्शन ने उन्हें इस खेल को करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उनका चयन राज्य निशानेबाजी अकादमी में हुआ।

अब अपने दूसरे एशियाई खेलों में आशी अनुभव, कड़ी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ उतरेंगी। उनका एकमात्र लक्ष्य पिछले एशियाई खेलों के पदक को इस बार स्वर्ण पदक में बदलना है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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