ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों से गंभीर पर्यावरणीय खतरा: अराघची

तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने आरोप लगाया है कि 40 दिनों तक चले युद्ध के दौरान ईरान की तेल इकाइयों, रिफाइनरियों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर अमेरिका तथा इजराइल के हमलों से गंभीर पर्यावरणीय खतरे पैदा हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इन हमलों से लगी आग और हाइड्रोकार्बन पदार्थों के जलने से निकले प्रदूषक हवा, मिट्टी और पानी को दूषित कर सकते हैं। इसका असर खाद्य श्रृंखला तक पहुंचने के साथ लंबे समय तक बना रह सकता है।

तेहरान में आयोजित ‘इकोसाइड : एक मूक युद्ध अपराध’ विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए अराघची ने कहा कि पर्यावरण को युद्ध का निशाना बनाए जाने के परिणाम हमले के स्थान और समय तक सीमित नहीं रहते। ईरानी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) का हवाला देते हुए कहा कि आग और जले हुए हाइड्रोकार्बन से खतरनाक रासायनिक यौगिक निकल सकते हैं।

अराघची ने गाजा और लेबनान में सैन्य हमलों से पर्यावरण को हुए नुकसान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान पर्यावरण और बुनियादी मानवाधिकारों को होने वाली क्षति की अनदेखी अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत नहीं की जानी चाहिए। हालांकि, उनके इन दावों और नुकसान के व्यापक आकलन की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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