यूपीआई अब भी आम आदमी के लिए फ्री, वित्त मंत्रालय ने बताया 15 अक्टूबर से किस पर लगेगा चार्ज

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कहा कि लोगों के बीच सामान्य रूप से किसी भी राशि के यूपीआई लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि छोटे व्यापारियों के लिए शून्य व्यापारी छूट दर के तहत लेन-देन के साथ-साथ व्यापारियों को दो हजार रुपये तक के भुगतान भी मुफ्त रहेंगे।

वित्त मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में बताया कि ग्राहकों के लिए यूपीआई अभी भी मुफ्त है। इसके साथ ही दोस्तों को पैसे भेजना, दुकानों पर पेमेंट करना या क्यूआर कोड स्कैन करना। इन सभी पर कोई चार्ज नहीं लगता। मंत्रालय ने कहा कि कुछ दावों में कहा गया है कि ये बदलाव विदेशी प्रभाव के कारण हुआ है, जो गलत है। मंत्रालय ने कहा कि भारत की यूपीआई पॉलिसी से जुड़े फ़ैसले आज़ादी से लिए जाते हैं, जिनका मकसद एक आत्मनिर्भर, समावेशी और किफायती डिजिटल पेमेंट सिस्टम बनाना है।

यूपीआई शुल्क में बदलाव की खास बातें:-

पी2पी पर कोई चार्ज नहीं:-वित्त मंत्रालय के मुताबिक एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (पी2पी) को पैसे भेजने पर हमेशा कोई चार्ज नहीं लगता, चाहे रकम कितनी भी हो।

छोटे व्यापारियों को सुरक्षा:- यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक कमाने वाले व्यापारियों के लिए कोई चार्ज नहीं लगता।

रोजाना के पेमेंट सुरक्षित:-वित्त मंत्रालय ने बताया कि 95 फीसदी से ज्यादा मर्चेंट पेमेंट 2 हजार रुपये से कम के होते हैं, ये मुफ्त रहते हैं।

2 हजार रुपये से ज्यादा पर मामूली एमडीआर:- दो हजार रुपये से ज्यादा के बड़े मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर व्यापारियों को एक छोटा शुल्क (0.4 फीसदी) देना होता है, जो क्रेडिट कार्ड या दूसरे नेटवर्क चार्ज की तुलना में बहुत कम है।

जरूरी सेवाओं पर शुल्क तय:- रेलवे, ईंधन, टेलीकॉम, बिल पेमेंट, इंश्योरेंस आदि के लिए 2 हजार रुपये से ज्यादा के ट्रांज़ैक्शन पर पांच रुपये का फिक्स्ड शुल्क लगता है।

खास कम दरें:- म्यूचुअल फंड और सिक्योरिटीज़ पेमेंट पर सिर्फ 0.02 फीसदी शुल्क लगता है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है।

ग्राहकों के लिए सुरक्षा उपाय

बैंकों को निर्देश:- व्यापारी एमडीआर का खर्च ग्राहकों पर नहीं डाल सकते।

कोई छिपा हुआ शुल्क नहीं:- यूपीआई ऐप्स प्लेटफॉर्म चार्ज नहीं लगा सकते।

“बाहरी दबाव” वाली गलतफहमी को दूर करना:-वित्त मंत्रालय ने बताया कि कुछ दावों में कहा गया है कि यह बदलाव विदेशी प्रभाव के कारण हुआ है। मंत्रालय ने कहा कि यह गलत है। भारत की यूपीआई पॉलिसी से जुड़े फ़ैसले आजादी से लिए जाते हैं, जिनका मकसद एक आत्मनिर्भर, समावेशी और किफायती डिजिटल पेमेंट सिस्टम बनाना है।

यह क्यों ज़रूरी है:-

वित्त मंत्रालय ने कहा कि 2016 में लॉन्च होने के बाद से, यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम इंटरऑपरेबल पेमेंट सिस्टम बन गया है। मंत्रालय ने बताया कि यह पूरी तरह से भारत की अपनी शर्तों पर हुआ है। अकेले अगस्त 2026 में यूपीआई ने 24.5 अरब ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस किए गए। इस सिस्टम को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और इनोवेटिव बनाए रखने के लिए ज़्यादा कीमत वाले मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर लगने वाला छोटा शुल्क इन चीज़ों में मदद करता है।

बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा

टियर III-VI शहरों और ग्रामीण इलाकों में छोटे व्यापारियों को मदद, यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए जागरूकता और इंसेंटिव। नया फ़्रेमवर्क यह पक्का करता है कि ज़्यादा कीमत वाले मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन से मिलने वाले संसाधनों का इस्तेमाल छोटे व्यवसायों को मदद करने और पूरे देश में डिजिटल पेमेंट को मज़बूत करने के लिए किया जाए।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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