जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। जगदलपुर के जिला एवं सत्र न्यायालय में स्थित एनआईए की विशेष अदालत के न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने सभी 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है।
न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा है कि दोषियों को 30 दिन के अंदर उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार है। कोर्ट ने पांच सितंबर को लगभग 13 वर्ष तक चली सुनवाई में 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज के आधार पर अपने निर्णय में 10 आराेपित नक्सलियाें को दाेषी ठहराया था। सभी दोषी प्रमिला मोडियाम, सुमित्रा पुनेम, मुक्का मांडवी, मड़कामी देवा, कोसा कवासी, आयत मरकाम, बंजामी सेना, चैतू लेकाम, जोगा मड़कामी और महादेव नागा वर्तमान में केंद्रीय कारागार जगदलपुर में बंद हैं।
बुधवार को अभियोजन पक्ष की ओर से एनआईए के अधिवक्ता दिनेश पानीग्राही ने दोषियों को मृत्युदंड की मांग की थी। पानीग्राही का कहना है कि इस मामले में जिन गंभीर धाराओं के तहत आराेपिताें को एनआईए की विशेष अदालत ने दोषी पाया है, उसमें आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक की सजा का प्रावधान है। इसी आधार पर अदालत ने सभी को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।
हालांकि मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का रास्ता रहेगा। दोषियों को उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।
इस मामले में कुल 11 आरोपिताें के खिलाफ सुनवाई चली थी, जिनमें से एक आोरोपित की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। एनआईए ने वर्ष 2015 में करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट पेश की थी और न्यायालय में 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए थे।








