डीआरडीओ के कार्यक्रम में बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह-भविष्य के युद्ध में अहम भूमिका निभाएंगे AI और ड्रोन

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार डीआरडीओ की ओर से आयोजित डीआरडीओ-इंडस्ट्री सिनर्जी मीट ‘विमर्श 2026’ को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक रूप से मजबूत देश बनाने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसा भारत बनाना है जो तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और रणनीतिक रूप से सुरक्षित हो। भविष्य के युद्ध में तकनीकी बढ़त ही रणनीतिक बढ़त तय करेगी। आज हम जिस तकनीक की कल्पना कर रहे हैं, वही कल की सैन्य क्षमताओं का आधार बनेगी। इस व्यापक लक्ष्य को हासिल करने में रक्षा क्षेत्र की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और यह इस विजन का ‘आधार स्तंभ’ है।
2047 तक रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर
सिंह ने आगे कहा कि 2047 तक हमें महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी, स्वदेशी सामग्री के इस्तेमाल में उल्लेखनीय वृद्धि करनी होगी, रक्षा निर्यात को कई गुना बढ़ाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की मजबूत मौजूदगी हो। इन लक्ष्यों को सहयोग के बिना हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए रक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों के बीच साझेदारी और समन्वय को और मजबूत करना होगा।
‘डीआरडीओ-उद्योग साझेदारी को उत्पादन से आगे ले जाने की जरूरत’
यह कार्यक्रम डीआरडीओ-इंडस्ट्री सिनर्जी मीट ‘विमर्श 2026’ के तहत नई दिल्ली स्थित डीआरडीओ भवन में आयोजित किया गया। सिंह ने कहा कि डीआरडीओ और उद्योग के बीच साझेदारी केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे अनुसंधान, डिजाइन, परीक्षण, प्रमाणन और विनिर्माण की पूरी मूल्य श्रृंखला तक विस्तार दिया जाना चाहिए। बड़ी कंपनियों के साथ-साथ एमएसएमई और स्टार्टअप को भी इस पूरी मूल्य श्रृंखला का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
एआई और ड्रोन बदलेंगे भविष्य के युद्ध का स्वरूप
रक्षा मंत्री ने कहा कि उभरती प्रौद्योगिकियां, खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और ड्रोन, भविष्य के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने रक्षा क्षेत्र से तकनीकी नवाचार की गति तेज करने का आह्वान किया। आज हम देख रहे हैं कि एआई का इस्तेमाल ऐसी तस्वीर बनाने के लिए किया जा सकता है, जो 80 के दशक की प्रतीत होती है। असली खुशी तब होगी, जब हम आज से 40-50 साल आगे के भविष्य की तस्वीर पेश कर सकें।
आज की कल्पना बनेगी कल की सैन्य क्षमता
सिंह ने कहा, ‘हम 40-50 साल बाद भारत को जैसा देखना चाहते हैं, उसकी कल्पना ही हमारे उत्साह को नई ऊर्जा देगी।’ उन्होंने कहा कि जो कंपनियां नई और उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश करेंगी, वही भविष्य में तकनीकी नेतृत्व हासिल करेंगी। हमें केवल भविष्य की तकनीक की कल्पना नहीं करनी है, बल्कि भविष्य की तकनीक को आज ही विकसित करना है। क्योंकि भविष्य के युद्ध में केवल वही देश रणनीतिक बढ़त हासिल कर सकेगा, जो तकनीक के क्षेत्र में नेतृत्व करेगा। आज की हमारी कल्पना ही कल की सैन्य क्षमताओं का रूप लेगी।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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