रांची: न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल, रांची में पहली बार अवेक क्रैनियोटॉमी (मरीज के जागते हुए की जाने वाली ब्रेन सर्जरी) की गई। इस सर्जरी द्वारा दिमाग के स्पीच एरिया से ब्रेन ट्यूमर को निकाला गया। यह सर्जरी भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल्स, रांची के सीनियर कंसल्टेंट-न्यूरोसर्जरी डॉ. विक्रम सिंह ने की। 55 साल के मरीज के दिमाग के बाएं फ्रंटल हिस्से में ट्यूमर था। दिमाग का यह हिस्सा बोलने और भाषा की क्षमता को नियंत्रित करता है।
दिमाग के इस हिस्से में सर्जरी करना बहुत चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि इससे मरीज की बोलने की क्षमता खत्म हो सकती है। इसी वजह से डॉक्टरों ने अवेक क्रैनियोटॉमी की। इस सर्जरी में मरीज को होश में रखा गया, ताकि ऑपरेशन के दौरान उनके न्यूरोलॉजिकल फंक्शंस पर नजर रखी जा सके।
अवेक क्रैनियोटॉमी के दौरान सर्जरी के जरूरी हिस्से में मरीज को होश में रखा जाता है, ताकि वो डॉक्टरों से बात कर सकें और उनके सवालों का जवाब दे सकें। इससे डॉक्टर ट्यूमर को निकालते हुए मरीज की बोलने और हाथ-पैर हिलाने जैसी जरूरी न्यूरोलॉजिकल क्षमताओं पर नजर रख पाते हैं। इससे डॉक्टरों को यह पता चलता रहता है कि दिमाग का कौन-सा हिस्सा महत्वपूर्ण है, ताकि उसे नुकसान न पहुंचे और ट्यूमर को ज्यादा से ज्यादा सुरक्षित तरीके से निकाला जा सके।
भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल, रांची में सीनियर कंसल्टेंट-न्यूरोसर्जरी डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि, “मरीज के दिमाग में बोलने और भाषा की क्षमता से जुड़े हिस्से में ट्यूमर था। इसलिए ऑपरेशन के दौरान इन क्षमताओं को सुरक्षित रखना हमारे लिए बहुत जरूरी था। ट्यूमर की जगह को देखते हुए हमने अवेक क्रैनियोटॉमी की। इसमें ऑपरेशन के जरूरी समय पर मरीज को होश में रखा गया, ताकि हम उनकी स्पीच और न्यूरोलॉजिकल क्षमताओं की निगरानी करते हुए सर्जरी कर सकें। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत अच्छी रही और उन्हें कोई नई न्यूरोलॉजिकल परेशानी नहीं हुई। फॉलो-अप में भी मरीज की स्थिति अच्छी है और वह जल्द ही स्वस्थ हो रहा है।
भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल, रांची में क्रिटिकल केयर के चेयरमैन डॉ. विजय कुमार मिश्रा ने बताया कि यह एक चुनौतीपूर्ण मामला था, क्योंकि ट्यूमर दिमाग के एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्से में था। सर्जरी के दौरान मरीज का आराम में रहना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टरों को जवाब देना जरूरी था। इन सब में न्यूरो-एनेस्थीसिया टीम की अहम भूमिका रही। टीम ने यह सुनिश्चित किया कि मरीज पूरी सर्जरी के समय स्थिर रहे और ऑपरेशन के दौरान सहयोग कर सके। सर्जरी सफल रही और इसके बाद मरीज ने बेहतरीन रिकवरी की।
अवेक ब्रेन सर्जरी खासतौर पर उन ट्यूमर के मामलों में बेहद उपयोगी होती है, जो दिमाग के बोलने, चलने-फिरने या शरीर के दूसरे जरूरी कामों को नियंत्रित करने वाले हिस्सों के पास होते हैं। ऐसी सर्जरी का मकसद सिर्फ ट्यूमर को ज्यादा से ज्यादा सुरक्षित तरीके से निकालना नहीं, बल्कि मरीज की जरूरी क्षमताओं को बचाए रखना और उसकी जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखना भी होता है।
इस सफल सर्जरी के साथ भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल, रांची ने न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
यह उपलब्धि दिखाती है कि अब रांची और आसपास के क्षेत्र के मरीजों को ब्रेन ट्यूमर के इलाज के लिए आधुनिक और जटिल न्यूरोसर्जरी की सुविधाएं भी मिल रही हैं।








