सीजीएल-टीडीपीएल परीक्षा रद्द करने के फैसले के खिलाफ नियुक्त कर्मियों का प्रदर्शन

रांची। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी सीजीएल और टीडीपीएल के माध्यम से आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने तथा सीआईडी जांच कराने की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की घोषणा के बाद इन परीक्षाओं के जरिए नियुक्त कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। नियुक्त कर्मियों ने सोमवार देर रात तक प्रोजेक्ट भवन परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। मंगलवार सुबह भी बड़ी संख्या में कर्मचारी प्रोजेक्ट भवन पहुंचे और कुछ घंटे धरना देकर सरकार से अपनी नौकरी सुरक्षित रखने की मांग की।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने कहा कि यदि किसी अभ्यर्थी की नियुक्ति में अनियमितता साबित होती है या उसकी ओर से कोई गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन बिना किसी व्यक्तिगत दोष के करीब दो हजार नियुक्त सीजीएल कर्मियों की नौकरी पर सवाल उठाना न्यायसंगत नहीं है।

कर्मचारियों ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि नौकरी कर रहे करीब दो हजार सीजीएल कर्मियों का अपराध क्या है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नौकरी कर रहे कर्मियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, सरकार की ओर से पूर्व में कराई गई सीआईडी जांच में प्रश्नपत्र लीक होने की बात सामने नहीं आई थी। ऐसे में यदि अब बड़े स्तर पर अनियमितता या किसी व्यक्ति की संलिप्तता की बात सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी नियुक्त कर्मियों पर डालना उचित नहीं होगा।

नियुक्त कर्मियों ने मांग की कि यदि सरकार उनकी नियुक्तियों को गलत या अवैध मानती है तो न्यायालय में शपथपत्र दाखिल कर स्पष्ट करे कि नियुक्त कर्मचारियों ने कौन-सा अपराध किया है और उनकी नियुक्ति किस आधार पर अवैध है। उन्होंने कहा कि किसी कर्मचारी की नौकरी केवल मौखिक आदेश या आंदोलन के दबाव में समाप्त नहीं की जा सकती। इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

कर्मचारियों ने कहा कि वे न्यायालय के आदेश और विधिक प्रक्रिया का सम्मान करेंगे। अदालत उनकी नियुक्तियों के संबंध में जो फैसला देगी, वे उसका पालन करेंगे, लेकिन केवल सरकार के मौखिक आदेश के आधार पर नौकरी छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।

धरना समाप्त करने के बाद नियुक्त कर्मचारी प्रोजेक्ट भवन और अन्य स्थानों पर अपने-अपने कार्यों में लौट गए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि नौकरी की सुरक्षा को लेकर उनका विरोध और सरकार के साथ संवाद जारी रहेगा।

उल्लेखनीय है कि जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच, देवेंद्र नाथ महतो गुट सहित विभिन्न छात्र संगठनों के आंदोलन के 24वें दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मीडिया के सामने छात्रों की मांगों पर कार्रवाई की घोषणा की थी। उन्होंने जेपीएससी-जेएसएससी सीजीएल और टीडीपीएल के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने के साथ ही मामले की सीआईडी जांच कराने की बात कही थी।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद इन परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त करीब दो हजार युवाओं में असमंजस और आक्रोश की स्थिति है। नियुक्त कर्मियों का कहना है कि वे चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद वैध तरीके से नौकरी कर रहे हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी का खामियाजा उन्हें नहीं भुगतना चाहिए।

नियुक्त कर्मियों ने सरकार से मांग की है कि किसी भी कार्रवाई से पहले प्रत्येक नियुक्ति और अभ्यर्थी की भूमिका की जांच की जाए तथा जिनके खिलाफ कोई अनियमितता साबित नहीं होती, उनकी नौकरी सुरक्षित रखी जाए।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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