एसपीजेआईएमआर ने अपने पीजीपीडीएम पाठ्यक्रम और कार्यक्रम का व्यापक पुनर्गठन किया

रांची: भारत का सोशल सेक्टर तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक चैरिटी आधारित मॉडल की जगह अब ऐसे विकास मॉडल अपनाए जा रहे हैं, जिनमें ठोस परिणाम, नवाचार, तकनीक और विभिन्न क्षेत्रों के बीच सहयोग पर अधिक जोर दिया जा रहा है। सोशल एंटरप्रेन्योरशिप, इम्पैक्ट इन्वेस्टिंग, ईएसजी, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी जैसी अवधारणाएं भी सामाजिक विकास के तरीके को नई दिशा दे रही हैं। इन्हीं बदलावों को ध्यान में रखते हुए भारतीय विद्या भवन के एस.पी. जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च ने अपने पोस्‍ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन डेवलपमेंट मैनेजमेंट के पाठ्यक्रम में बदलाव किया है। साथ ही, फरवरी 2027 से शुरू होने वाले बैच-28 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

एसपीजेआईएमआर के पीजीपीडीएम के चेयरपर्सन प्रोफेसर तनोज कुमार मेश्राम का मानना है कि आज सामाजिक क्षेत्र अलग-थलग रहकर काम नहीं करता। भारतीय सिविल सेवा से लेकर सामाजिक क्षेत्र और शिक्षण जगत तक के अपने अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, पीजीपीडीएम ने ऐसे पेशेवरों का मजबूत समुदाय तैयार किया है, जहां अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग सिर्फ साथ पढ़ते ही नहीं, बल्कि मिलकर ऐसे समाधान विकसित करते हैं, जिन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जा सके और जिनका समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़े।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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