स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी का केवल उपभोक्ता नहीं, अग्रणी उत्पादक बने भारत: कुमारस्वामी

नई दिल्ली। केंद्रीय इस्पात  इस्पात और भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने गुरुवार को कहा कि भारत को दुनिया की स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी का केवल सबसे बड़ा उपभोक्ता नहीं बल्कि अग्रणी उत्पादक भी बनना चाहिए जो वैश्विक ऊर्जा बदलाव को गति देगा।

कुमारस्वामी ने नई दिल्ली में आयोजित 7वें सीआईआई अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन एवं प्रदर्शनी को संबोधित के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा का व्यापक उपयोग, ऊर्जा-दक्ष प्रौद्योगिकियों को अपनाना, संसाधनों का अधिक कुशलतापूर्वक उपयोग तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, “हमारा विजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कल्याण में योगदान करते हुए घरेलू स्तर पर ऐसी क्षमताएं विकसित करना है, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हों। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है। भारत दुनिया की स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों का केवल सबसे बड़ा उपभोक्ता ही नहीं बने बल्कि देश को उन उपकरणों, सामग्रियों और प्रौद्योगिकियों का दुनिया का अग्रणी उत्पादक बनना चाहिए जो वैश्विक ऊर्जा बदलाव को आगे बढ़ाएंगी।’’ मंत्री ने कहा कि भारत एक ऐसे विकास मॉडल पर काम कर रहा है, जो तीव्र आर्थिक वृद्धि के साथ रणनीतिक औद्योगिक क्षमता को भी जोड़ता है।

कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘हमारा उद्देश्य ऐसे घरेलू विनिर्माण परिवेश का निर्माण करना है, जो मूल्य के साथ-साथ रोजगार सृजित करे। यही 21वीं सदी में मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं का सार है। मैं उद्योग जगत और सभी संबंधित पक्षों से आग्रह करता हूं कि वे सरकार के साथ मिलकर आत्मनिर्भर भारत और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में सहयोग करें।’’

उन्होंने कहा कि आज भारत की ऊर्जा सुरक्षा केवल इसके संसाधनों तक पहुंच तक सीमित नहीं रह गई है। अब यह इस बात से तय होती है कि भविष्य को ऊर्जा प्रदान करने वाली प्रौद्योगिकियों के लिए देश कितनी विनिर्माण क्षमता विकसित कर सकता है, कितना नवोन्मेष कर सकता है और कितनी मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएं तैयार कर सकता है।

मंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा बदलाव में इस्पात को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सौर पार्क, पवन टर्बाइन, ट्रांसमिशन नेटवर्क, बैटरी विनिर्माण इकाइयों, बंदरगाह और हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं सहित नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना में होने वाला प्रत्येक बड़ा निवेश मूल रूप से इस्पात पर निर्भर करता है।

देश के इलेक्ट्रिक परिवहन परिवेश को औद्योगिक प्रगति का उदाहरण बताते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि यह केवल मांग आधारित प्रोत्साहन से आगे बढ़कर एक व्यापक विनिर्माण रणनीति में बदल चुका है। उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में देश में लगभग 3.1 करोड़ वाहनों का विनिर्माण हुआ, जबकि इस क्षेत्र से निर्यात 53 लाख इकाइयों के पार पहुंच गया।

कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘जो पहल मांग आधारित समर्थन के रूप में शुरू हुई थी, वह अब विनिर्माण, बैटरी के स्थानीयकरण, चार्जिंग अवसंरचना, अत्याधुनिक सामग्रियों और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा को शामिल करने वाली व्यापक औद्योगिक रणनीति का रूप ले चुकी है।’’

मंत्री ने कहा कि 10,900 करोड़ रुपये के व्यय वाली पीएम ई-ड्राइव योजना इस दृष्टिकोण का उदाहरण है। ‘‘यह योजना मांग सृजन के साथ-साथ घरेलू विनिर्माण क्षमता को भी मजबूत कर रही है।’’

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अंग भारत • रिपोर्टर

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