दवाओं की बिक्री पर सख्त निगरानी की तैयारी, स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स में बदलाव का दिया प्रस्ताव

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवाओं की बिक्री पर निगरानी मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने शेड्यूल एच, एच1 और एक्स श्रेणी की दवाओं की नियामकीय निगरानी मजबूत करने के लिए ड्रग्स रूल्स, 1945 में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत देशभर के मेडिकल स्टोर पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य करने की योजना है।

8 सितंबर को जारी हुआ ड्राफ्ट नोटिफिकेशन

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने इस संबंध में 8 सितंबर 2026 को ड्राफ्ट गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। प्रस्ताव का उद्देश्य बिना डॉक्टर के पर्चे के प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पर रोक लगाना और फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ाना है।

संवेदनशील श्रेणी में आती हैं ये दवाएं

मंत्रालय के मुताबिक, शेड्यूल एच, एच1 और एक्स श्रेणी की दवाएं बेहद संवेदनशील हैं। इनमें एंटीबायोटिक्स, साइकोट्रॉपिक दवाएं, नशीली दवाओं वाले पेनकिलर और कई अन्य शक्तिशाली दवाएं शामिल हैं। इनके गलत इस्तेमाल से स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। मेडिकल स्टोर पर बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन इन दवाओं की बिक्री की शिकायतों को देखते हुए सीसीटीवी को अतिरिक्त सुरक्षा उपाय के तौर पर लागू करने का प्रस्ताव दिया गया है।

डीसीसी के बाद डीटीएबी में हुई चर्चा

यह प्रस्ताव पहले ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी (डीसीसी) के सामने रखा गया था, जहां इस पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद प्रस्ताव को ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) के पास भेजा गया। डीटीएबी के सदस्यों ने सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श के बाद प्रस्ताव को मंजूरी देने की सिफारिश की है।

सीसीटीवी से बिक्री का रिकॉर्ड रखने में मदद

मंत्रालय का मानना है कि मेडिकल स्टोर में सीसीटीवी कैमरे लगाने से दवाओं की बिक्री का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। इससे यह पता लगाने में आसानी होगी कि कौन सी दवा किस प्रिस्क्रिप्शन पर और किस व्यक्ति को बेची गई। इससे अनधिकृत बिक्री पर रोक लगाने के साथ एंटीबायोटिक्स के दुरुपयोग और नशे के लिए दवाओं के इस्तेमाल जैसी समस्याओं से निपटने में मदद मिलने की उम्मीद है।

हितधारकों और आम जनता से मांगे सुझाव

सरकार ने ड्राफ्ट प्रस्ताव पर सभी हितधारकों, दवा व्यापारियों, फार्मासिस्ट संगठनों और आम जनता से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी हैं। प्रस्ताव पर अपनी राय रखने वाले लोग स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को लिखित रूप में सुझाव भेज सकते हैं। इसके अलावा ईमेल के माध्यम से भी अपनी आपत्तियां और सुझाव दिए जा सकते हैं।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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